पचंबा का सार्वजनिक दुर्गा स्थान काफी ऐतिहासिक है। टिकैत शासन से ही यहां शारदीय नवरात्र का आयोजन हो रहा है. वर्ष 1880 में टिकैत स्व. सिद्धनाथ ने मां दुर्गा की पूजा शुरू की थी। टिकैत की तबीयत खराब होने के बाद वर्ष 1955 में इस मंडप को सार्वजनिक घोषित किया गया। इसके बाद गिरिडीह के प्रथम सांसद नागेश्वर प्रसाद सिन्हा को पूजा समिति का अध्यक्ष बनाया गया.
पिछले 142 वर्षो से अधिक से यहां मां दुर्गा की पूजा की जा रही है। मंडप में सैकड़ों गांव के लोग यहां पूजा करने के लिए पहुंचते हैं। पूजा समिति के सचिव दीपक साह ने बताया कि 1955 के बाद इस मंडप का जीर्णाद्धार शुरू हुआ। इसके बाद मंडप में प्रतिवर्ष कुछ न कुछ काम होते रहता है। उन्होंने बताया कि इस मंडप में पूजा-अर्चना करने से लोगों की सारी बाधा दूर होती है।